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Where is Devidhura Temple Located? Learn about the 4 amazing secrets of this sacred Place : देवीधुरा मन्दिर कहाँ है? जानिए इस धाम के 4 अद्भुत रहस्य

Devidhura Temple, जिसे स्थानीय लोग “वराह क्षेत्र” और “देवीधुरा धाम” के नाम से जानते हैं, उत्तराखण्ड का एक अत्यंत पवित्र, ऐतिहासिक और रहस्यमयी शक्तिपीठ है। यह मंदिर कुमाऊँ मंडल के चंपावत जिले में पड़ता है और अपनी अनोखी परंपराओं, प्राकृतिक सौंदर्य, और सहस्राब्दियों पुरानी कथा-कहानियों के लिए प्रसिद्ध है।

देवीधुरा का सबसे बड़ा आकर्षण यहां की बराही देवी, जिन्हें माता वाराही, माता बाराही या माता देबी के नाम से पूजा जाता है। माना जाता है कि माता की यह शक्ति स्वरूप, भगवान विष्णु के वराह अवतार से संबंधित है।

Ma Devidhura Temple कहाँ स्थित है?

Ma Devidhura Temple चंपावत जिले में, लोहाघाट के पास एक खूबसूरत पहाड़ी घाटी में स्थित है।

  • लोहाघाट से दूरी: लगभग 7 km
  • चंपावत से दूरी: लगभग 45 km
  • भीमताल / नैनीताल से दूरी: लगभग 85–90 km

यह क्षेत्र घने देवदार, बुरांश, ओक और चीड़ के जंगलों से घिरा हुआ है, इसलिए यहां पहुंचते ही एक शांत, दिव्य और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव होता है।


Ma Devidhura Temple का इतिहास और पौराणिक मान्यता

देवीधुरा का इतिहास हजारों वर्षों पुराना बताया जाता है। यहां की माता वाराही को कात्यायनी, चण्डिका और धार्मिक रक्षा देवी का स्वरूप माना जाता है।

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1. वराह अवतार से संबंध

कहानी के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने हिरण्याक्ष को मारने के लिए वराह अवतार लिया, तब उनकी पत्नी लक्ष्मी ने पृथ्वी की रक्षा हेतु माता वाराही के रूप में शक्तिरूप धारण किया। वही शक्ति देवीधुरा में विराजमान मानी जाती है।

2. पाण्डवों का संबंध

लोककथाओं में माना जाता है कि अर्जुन ने अपने वनवास के दौरान यहां तपस्या की थी।
स्थानीय लोग कहते हैं कि देवीधुरा क्षेत्र पाण्डवों का तपोस्थल था जहाँ उन्होंने अपनी माता कुंती के साथ कुछ समय बिताया।

3. पशुरहित बलिदान का स्थान

देवीधुरा की खास बात यह है कि यहां कभी पशु बलि नहीं दी जाती। कहा जाता है कि हजारों साल पुराने एक समझौते के अनुसार, किसी भी प्रकार के पशु को नुकसान नहीं पहुंचाया जाता। देवी को प्रसन्न करने के लिए केवल फूल, नारियल और हल्दी-चावल ही चढ़ाए जाते हैं।


Ma Devidhura Temple का मेला

देवीधुरा मंदिर पूरे भारत में बगवाळा मेला के लिए विश्वप्रसिद्ध है।

बगवाळा क्या है?

यह रक्षाबंधन के दिन मनाया जाने वाला एक अद्वितीय युद्ध-खेल है, जिसमें चारों खाम (चार प्रमुख जातीय समूह) —

  • **लमगड़िया
  • गहरवाल
  • हरिसिंह-मेहता
  • चौधरी**

आपस में बिना किसी दुश्मनी के, पत्थर फेंककर युद्ध खेलते हैं।

इसे लोकभाषा में “पाषाण युद्ध” भी कहा जाता है।

बगवाळा का उद्देश्य

माना जाता है कि देवी की पूजा के लिए कभी राक्षस मनुष्यों से बलिदान मांगते थे। तब चार खामों ने निर्णय लिया कि वे बलिदान न देकर, पत्थरों से युद्ध करके अपनी वीरता देवी को अर्पित करेंगे।
माता ने इसे स्वीकार किया और इस परंपरा को आज तक निभाया जा रहा है।

आजकल सुरक्षा के लिए,

  • ढाल,
  • हेलमेट,
  • जाल,
  • सीमित पत्थर क्षेत्र
    का इस्तेमाल किया जाता है।

मंदिर की विशेष वास्तुकला

देवीधुरा मंदिर पहाड़ी कारीगरी का उत्कृष्ट उदाहरण है।

  • लकड़ी और पत्थरों से बना गर्भगृह,
  • पारंपरिक कुमाऊँनी छत,
  • और बिना आधुनिक सजावट के प्राकृतिक रूप
    मंदिर को बेहद आकर्षक और दिव्य बनाते हैं।

मंदिर परिसर में महासमर (बगवाळा) से जुड़े प्राचीन शिलालेख भी मौजूद हैं।


देवीधुरा में क्या-क्या देखें? (Things to Explore)

देवीधुरा आने वाले यात्रियों के लिए कई दर्शनीय स्थल हैं:

1. बराही देवी का मुख्य मंदिर

यहाँ का गर्भगृह अत्यंत शक्तिशाली और शांत माना जाता है। मंदिर में घंटियों की कतारें और धूप-दीप की सुगंध मन को आध्यात्मिक बना देती है।

2. घाटी और जंगल

देवीधुरा के आसपास का घना जंगल ट्रेकिंग और प्रकृति प्रेमियों के लिए बेहतरीन है।

3. पाण्डव किला (Pandav Kota)

एक प्राचीन स्थान जो पाण्डवों से जुड़ा हुआ बताया जाता है।

4. बगवाळा युद्ध स्थल

जहां हर साल रक्षाबंधन पर अनोखा पत्थर युद्ध खेला जाता है।


देवीधुरा कैसे पहुंचे?

By Road:

लोहाघाट → देवीधुरा (7 km)
सड़क बहुत खूबसूरत और सुरक्षित है।

Nearest Railway Station:

  • टनकपुर (Tanakpur) – लगभग 110 km
  • काठगोदाम (Kathgodam) – लगभग 140 km

Nearest Airport:

  • पंतनगर (Pantnagar Airport) – लगभग 170 km

देवीधुरा घूमने का सबसे अच्छा समय

  • February–June (Spring & Summer) – मौसम सुहावना रहता है
  • August (Bagwal Festival) – रक्षाबंधन का पाषाण युद्ध
  • September–November – साफ आसमान, ट्रेकिंग और फोटोग्राफी के लिए श्रेष्ठ

सर्दियों (December–January) में यहाँ काफी ठंड रहती है।

देवीधुरा क्यों विशेष है? — मुख्य कारण

  • शक्तिपीठ स्वरूप
  • वराह अवतार की ऊर्जा
  • पाषाण युद्ध (Bagwal) की अनोखी परंपरा
  • देवीधुरा मन्दिर एक प्राचीन मन्दिर है।
  • पहाड़ी संस्कृति का जीवंत उदाहरण
  • अत्यंत शांत और पवित्र स्थान
  • घने जंगलों और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच स्थित
  • पशु बलि का न होना
  • पाण्डवों से जुड़ी कथाएँ

निष्कर्ष

देवीधुरा मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की संस्कृति, इतिहास और आस्था का प्रतीक है। यहाँ आने से मन को आध्यात्मिक शांति मिलती है और पहाड़ों की खूबसूरती यात्रा को यादगार बना देती है।
यदि आप उत्तराखण्ड घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो देवीधुरा एक ऐसा स्थान है जिसे ज़रूर शामिल करें।

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